गिग इकॉनमी और डिलीवरी पार्टनर्स (Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto) के लिए कर्नाटक से एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रही मांगों और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद, कर्नाटक सरकार ने आखिरकार जुलाई 2026 से ‘गिग वर्कर्स वेलफेयर फीस’ (Gig Workers Welfare Fee) की वसूली एग्रीगेटर्स से आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। इसका सीधा असर बेंगलुरु और पूरे कर्नाटक में काम करने वाले लाखों फूड और ग्रोसरी डिलीवरी पार्टनर्स के जीवन और भविष्य पर पड़ेगा।
क्या है गिग वर्कर वेलफेयर फीस?
कर्नाटक प्लेटफॉर्म-बेस्ड गिग वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर) एक्ट के तहत, अब राज्य में काम करने वाली सभी एग्रीगेटर कंपनियों—जैसे कि स्विगी, ज़ोमैटो, ओला, उबर, और ब्लिंकिट—को अपने डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों को किए जाने वाले हर भुगतान (Payout) पर 1% से 5% तक की वेलफेयर फीस राज्य सरकार को चुकानी होगी।
सरकार के हालिया आदेश के अनुसार, शुरुआत में यह फीस 1% तय की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पैसा डिलीवरी पार्टनर की जेब या उसकी कमाई से नहीं काटा जाएगा। इसके बजाय, एग्रीगेटर कंपनियां अपनी ओर से यह फीस ‘गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड’ (Gig Workers Welfare Board) के फंड में जमा करेंगी।
कस्टमर टिप्स और इन्सेंटिव्स पर क्या होगा असर?
डिलीवरी पार्टनर्स के लिए एक राहत की बात यह है कि इस नए नियम के तहत ‘टिप्स’ (Tips) और ‘विशेष इन्सेंटिव्स’ (Incentives) को वेलफेयर फीस की गणना के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि बारिश के मौसम में मिलने वाला अतिरिक्त बोनस (Surge Pay) और ग्राहकों द्वारा दी गई टिप पूरी तरह से राइडर की ही रहेगी। कंपनियों को उस अतिरिक्त रकम पर कोई वेलफेयर टैक्स नहीं देना होगा, जिससे राइडर्स की अतिरिक्त कमाई सुरक्षित रहेगी।
डिलीवरी पार्टनर्स को क्या मिलेगा फायदा?

बरसों से डिलीवरी बॉयज़ एक असंगठित क्षेत्र (Informal sector) का हिस्सा रहे हैं, जहां उन्हें पीएफ (PF), पेंशन या मेडिकल इंश्योरेंस जैसी कोई ठोस सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती थी। इस 1% वेलफेयर फंड से इकट्ठा होने वाले करोड़ों रुपयों का इस्तेमाल सीधे तौर पर राइडर्स की भलाई के लिए किया जाएगा:
- हेल्थ और एक्सीडेंटल कवर: सड़क दुर्घटना की स्थिति में डिलीवरी पार्टनर और उसके परिवार को आर्थिक मदद और मुफ्त इलाज की सुविधा।
- पेंशन और भविष्य निधि: लगातार कई सालों तक डिलीवरी का काम करने वाले राइडर्स के लिए एक सुरक्षित पेंशन योजना।
- शिक्षा और मातृत्व लाभ: महिला गिग वर्कर्स के लिए मैटरनिटी लीव और पार्टनर्स के बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता।
अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल
कर्नाटक का यह कदम पूरे भारत की गिग इकॉनमी के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। जिस तरह से ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स (10 मिनट डिलीवरी) का विस्तार टियर-2 और टियर-3 शहरों में हो रहा है, उसे देखते हुए डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा सबसे अहम हो गई है। हाल के दिनों में हमने देखा है कि कैसे डिलीवरी पार्टनर्स लगातार काम की बेहतर शर्तों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।
कर्नाटक में पेमेंट और वेलफेयर फीस वेरिफिकेशन सिस्टम (PWFVS) लागू होने के बाद, अब हर एक राइडर का डेटा और कंपनियों द्वारा किया जाने वाला भुगतान पूरी तरह से पारदर्शी हो जाएगा। उम्मीद है कि कर्नाटक की तर्ज पर जल्द ही भारत के अन्य राज्य भी ऐसे कड़े और राइडर-हितैषी कानून लागू करेंगे, ताकि किसी भी डिलीवरी पार्टनर को भविष्य की चिंता किए बिना अपना काम करने की आज़ादी मिल सके।