सड़कों पर रोजाना 8 से 12 घंटे बाइक चलाना, भारी ट्रैफिक, खराब मौसम और समय पर डिलीवरी पहुंचाने का दबाव—गिग डिलीवरी का काम जितना कमाई का जरिया है, उतना ही जोखिम भरा भी है। 2026 में भारत के रोड सेफ्टी और लेबर वेलफेयर नियमों के तहत लगभग सभी प्रमुख फूड और क्विक कॉमर्स कंपनियों (Zomato, Swiggy, Zepto, Blinkit आदि) ने अपने राइडर्स के लिए ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस अनिवार्य कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका delivery partner insurance असल में कब और कैसे काम करता है?
अधिकांश डिलीवरी राइडर्स को इस बात की पूरी जानकारी नहीं होती कि दुर्घटना होने पर कंपनी का इंश्योरेंस कैसे क्लेम किया जाए। कई बार सही समय पर सूचना न देने या आवश्यक दस्तावेज (जैसे FIR, डिस्चार्ज समरी, ऑन-ड्यूटी लोकेशन डेटा) न होने के कारण राइडर्स के क्लेम खारिज हो जाते हैं और अस्पताल का सारा खर्च उनके परिवार पर आ पड़ता है।
इस संपूर्ण 2026 गाइड में हम डिलीवरी पार्टनर इंश्योरेंस कवरेज, एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, एक्सक्लूशन्स (किन स्थितियों में पैसा नहीं मिलता) और स्टेप-बाय-स्टेप क्लेम प्रोसेस को आसान हिंदी में समझाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में आपका हक सुरक्षित रहे।
डिलीवरी पार्टनर इंश्योरेंस में क्या-क्या कवर होता है? (Coverage Scope)
डिलीवरी कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला इंश्योरेंस आमतौर पर ‘ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट (GPA) पॉलिसी’ के तहत आता है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- एक्सीडेंटल मेडिकल हॉस्पिटलाइजेशन (OPD & IPD): ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में घायल होने पर अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी, दवाइयों और बेड चार्ज का खर्च (कवरेज ₹1 लाख से ₹3 लाख तक)।
- एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट (Accidental Death Cover): दुर्भाग्यवश ड्यूटी के दौरान किसी राइडर की सड़क हादसे में मृत्यु होने पर उसके नॉमिनी को एकमुश्त आर्थिक सहायता (कवरेज ₹5 लाख से ₹10 लाख तक)।
- स्थायी / आंशिक विकलांगता (Permanent/Partial Disability): हाथ, पैर या आंख की गंभीर क्षति होने पर विकलांगता प्रतिशत के अनुसार मुआवजा (₹2 लाख से ₹5 लाख तक)।
- डेली हॉस्पिटल कैश अलाउंस (Hospital Cash): अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान दैनिक कमाई के नुकसान की भरपाई के लिए ₹400 से ₹800 प्रति दिन का अलाउंस (अधिकतम 14-30 दिन)।
कंपनी-वाइज इंश्योरेंस कवरेज और बेनिफिट्स (2026 Overview)

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किन हालातों में इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाता है? (Crucial Exclusions)
बीमा नियामक Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी पॉलिसियों में कुछ सख्त अपवाद होते हैं। यदि कोई राइडर निम्नलिखित गलतियां करता है, तो क्लेम तुरंत रिजेक्ट हो जाएगा:
- शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में ड्राइविंग: मेडिकल रिपोर्ट में अल्कोहल की पुष्टि होने पर कोई क्लेम नहीं मिलता।
- बिना हेलमेट ड्राइविंग: दुर्घटना के समय आईएसआई-मार्क हेलमेट न पहनना पॉलिसी नियमों का उल्लंघन है।
- ऑफ-ड्यूटी एक्सीडेंट: जब ऐप में ‘Off-Duty’ या ‘Offline’ स्टेटस हो और कोई पर्सनल ट्रिप चल रही हो।
- बिना वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस: एक्सपायर्ड या फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस होने पर बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर देती है।
- 48 घंटे के बाद सूचना देना: दुर्घटना की जानकारी समय सीमा के भीतर राइडर सपोर्ट या टीपीए (Third Party Administrator) को न देना।
स्टेप-बाय-स्टेप: एक्सीडेंट होने पर इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें?
यदि आपके या आपके साथी राइडर के साथ कोई सड़क दुर्घटना हो जाए, तो तुरंत इन 6 स्टेप्स को फॉलो करें:
स्टेप 1: आपातकालीन SOS बटन दबाएं तुरंत डिलीवरी ऐप के अंदर दिए गए ‘Emergency / SOS’ बटन को दबाएं ताकि कंपनी की सेफ्टी टीम और एम्बुलेंस को लाइव लोकेशन मिल सके।
स्टेप 2: नजदीकी नेटवर्क अस्पताल में एडमिट हों घायल को पास के टीपीए नेटवर्क अस्पताल में ले जाएं। वहां राइडर पार्टनर आईडी और आधार कार्ड दिखाकर कैशलेस ट्रीटमेंट की रिक्वेस्ट करें।
स्टेप 3: पुलिस एफआईआर या मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज कराएं सड़क हादसे के क्लेम के लिए अस्पताल द्वारा जारी MLC रिपोर्ट और स्थानीय पुलिस स्टेशन की FIR कॉपी अनिवार्य होती है।
स्टेप 4: राइडर सपोर्ट हेल्पलाइन पर एक्सीडेंट रिपोर्ट करें दुर्घटना के 24 से 48 घंटे के भीतर ऐप के हेल्प सेक्शन में जाकर ‘Report an Accident’ टिकट रेज करें।
स्टेप 5: सभी मेडिकल बिल और प्रिस्क्रिप्शन सुरक्षित रखें इमरजेंसी वार्ड पर्ची, डिस्चार्ज समरी, एक्स-रे/एमआरआई रिपोर्ट, मेडिकल स्टोर की सभी ओरिजिनल रसीदें संभाल कर रखें।
स्टेप 6: टीपीए पोर्टल पर क्लेम फॉर्म और दस्तावेज अपलोड करें कंपनी के इंश्योरेंस पार्टनर (जैसे Digit, ICICI Lombard, Acko) के लिंक पर जाकर क्लेम फॉर्म भरें। अप्रूवल के 7 से 15 दिनों में रीइंबर्समेंट राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या डिलीवरी पार्टनर का इंश्योरेंस प्रीमियम हर महीने उसकी कमाई से कटता है?
ज्यादातर मामलों में कंपनियां अपने एक्टिव राइडर्स का ग्रुप इंश्योरेंस प्रीमियम खुद वहन करती हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स मामूली वेलफेयर कंट्रीब्यूशन (₹5 से ₹10 प्रति हफ्ता) काटते हैं।
क्या रेस्टोरेंट से ऑर्डर लेते समय गिरने पर भी मेडिकल क्लेम मिलता है?
हाँ, यदि आप ऐप पर ‘On Duty’ हैं और ऑर्डर पिकअप या डिलीवरी के दौरान सीढ़ियों से फिसलने या किसी अन्य कारण से चोटिल होते हैं, तो मेडिकल हॉस्पिटलाइजेशन कवर लागू होता है।
दुर्घटना के समय बाइक को हुए नुकसान का पैसा भी कंपनी देती है?
नहीं, डिलीवरी पार्टनर इंश्योरेंस केवल व्यक्ति (राइडर) के शारीरिक इलाज और जीवन सुरक्षा के लिए होता है। बाइक की मरम्मत के लिए आपकी अपनी टू-व्हीलर कंप्रिहेंसिव पॉलिसी होनी चाहिए।
अगर राइडर का बैंक अकाउंट लिंक न हो तो क्लेम का पैसा किसे मिलेगा?
राइडर की मृत्यु की स्थिति में राशि उसके द्वारा ऐप में रजिस्टर्ड ‘नॉमिनी’ (माता-पिता, पत्नी या कानूनी वारिस) के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
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Conclusion
सड़क पर सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। एक जागरूक डिलीवरी पार्टनर के रूप में आपको अपने इंश्योरेंस राइट्स, इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर्स और नॉमिनी डिटेल्स की पूरी जानकारी ऐप में अपडेट रखनी चाहिए। हमेशा हेलमेट पहनें, सेफ ड्राइविंग करें और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें।